सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ संयोग, 14 साल बाद फिर बनेगा ऐसा अवसर
रायपुर। इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व सोमवार को पड़ने के कारण विशेष संयोग बन रहा है। करीब 23 वर्ष बाद सोमवार के दिन नाग पंचमी मनाई जा रही है, जिसके चलते इसे सोमवती नागपंचमी कहा जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस तरह का संयोग अब दोबारा करीब 14 वर्षों बाद बनने की संभावना है।

सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार नाग पंचमी के साथ सावन के तीसरे सोमवार का व्रत और भगवान शिव की आराधना भी एक ही दिन होगी। इससे पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 2003 में बना था।
शिव और नाग देवता की आराधना का विशेष महत्व
भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का प्रत्येक सोमवार विशेष माना जाता है। वहीं नाग पंचमी नाग देवता की पूजा और प्रकृति के प्रति सम्मान का पर्व है। दोनों पर्वों का एक ही दिन होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर माना जा रहा है।
पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त को दोपहर 4 बजकर 52 मिनट से हो चुकी है और इसका समापन सोमवार शाम करीब 5 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी का पर्व सोमवार को मनाया जा रहा है।
शिव-नाग पूजा से दोषों से मुक्ति की मान्यता
नाग पंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करने की धार्मिक मान्यता है। इस दिन बनने वाले शुभ योगों में पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष, पितृ दोष सहित विभिन्न दोषों से मुक्ति मिलने और जीवन में सुख-शांति आने की मान्यता है।
इस दिन शुभ योग, शुक्ल योग और रवि योग बनने की बात कही गई है। इसके साथ गुरु के उच्च राशि में होने से हंस योग बनने का भी उल्लेख किया जा रहा है।
सुबह 5:50 से 8:28 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 5 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान करीब 2 घंटे 37 मिनट तक श्रद्धालु नाग देवता के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
श्रद्धालु इस दौरान कालसर्प दोष, पितृ दोष और नाग संबंधी दोषों की शांति के लिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा एवं उपाय कर सकते हैं। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना शुभ माना गया है।






