फ्रांस से खरीदे जाएंगे 26 लड़ाकू विमान, 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक डिलीवरी की उम्मीद
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने राफेल मरीन लड़ाकू विमानों को स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से संचालित करने की तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत गोवा में विमानों के परीक्षण किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य विमान में आवश्यक संशोधनों और आईएनएस विक्रांत की प्रणालियों के साथ उसकी अनुकूलता की पुष्टि करना है। यह कदम नौसेना की विमानवाहक पोत आधारित युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
26 राफेल मरीन विमानों की खरीद का समझौता
भारत और फ्रांस ने 28 अप्रैल 2025 को भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों की खरीद के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें 22 एकल सीट वाले और चार दो सीट वाले विमान शामिल हैं। समझौते में प्रशिक्षण, हथियार, संबंधित उपकरण और रखरखाव सहायता भी शामिल है।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, विमानों की आपूर्ति 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक होने की उम्मीद है। इन विमानों को नौसेना के विमानवाहक पोतों से संचालित करने की योजना है।
आईएनएस विक्रांत की प्रणाली के अनुरूप होंगे परीक्षण
आईएनएस विक्रांत में ऐसी प्रणाली का इस्तेमाल होता है, जिसमें लड़ाकू विमान ढलानदार उड़ान पट्टी की मदद से उड़ान भरते हैं और उतरते समय डेक पर लगे विशेष तारों की सहायता से रुकते हैं।
वहीं, राफेल मरीन को मूल रूप से ऐसी व्यवस्था वाले विमानवाहक पोतों के लिए विकसित किया गया था, जहां विमान गुलेल जैसी प्रक्षेपण प्रणाली की मदद से उड़ान भरते हैं। ऐसे में विमान को विक्रांत की उड़ान पट्टी, उतरने की व्यवस्था और अन्य प्रणालियों के अनुकूल बनाने के लिए परीक्षण जरूरी हैं।
गोवा में किए जा रहे परीक्षणों से विमान की परिचालन क्षमता और आवश्यक तकनीकी बदलावों का आकलन किया जा रहा है।
राफेल मरीन की क्या है खासियत?
राफेल मरीन फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा विकसित दो इंजन वाला बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। इसे समुद्री अभियानों और विमानवाहक पोतों से संचालन के लिए तैयार किया गया है। यह हवाई रक्षा, दुश्मन के विमानों का मुकाबला करने, दूर तक हमला करने, टोही और समुद्री लक्ष्यों पर प्रहार करने जैसे अभियानों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस विमान में समुद्री विमानवाहक पोत पर उतरने के लिए विशेष संरचना और पकड़ने वाला हुक दिया गया है। इसके हथियारों में मेटिओर और मिका हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, स्कैल्प क्रूज मिसाइल, एक्सोसेट जहाजरोधी मिसाइल और हैमर सटीक हमले वाले हथियार शामिल हैं।
विमान का अधिकतम उड़ान भरने का वजन लगभग 24.5 टन है। इसमें दो सफ्रान एम88 इंजन लगे हैं और इसकी अधिकतम गति लगभग 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है।
समुद्र में बढ़ेगी नौसेना की ताकत
राफेल मरीन को भारतीय नौसेना में शामिल करने से विमानवाहक पोतों की हवाई युद्ध क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। समुद्र में तैनात नौसैनिक बेड़े को हवाई सुरक्षा देने, दुश्मन के विमानों का मुकाबला करने और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने में ये विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल गोवा में जारी परीक्षण विमान को भारतीय विमानवाहक पोतों की परिचालन जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। परीक्षणों के परिणाम और आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियां इसके आगे के एकीकरण में महत्वपूर्ण होंगी।











