रायगढ़, 29 अक्टूबर 2026। घर-घर नल से जल पहुंचने से ग्रामीण परिवारों की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाने को मजबूर परिवारों को अब घर पर ही पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे विशेष रूप से महिलाओं का समय और श्रम बच रहा है तथा बच्चों सहित परिवार के अन्य सदस्यों को भी राहत मिल रही है। इसी क्रम में चिटकाकानी और त्रिभौना गांव में ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल के महत्व की जानकारी देने के साथ जल गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण भी दिया गया।
ग्रामीणों को सिखाई जल गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया
प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीणों को पानी के नमूने की जांच करने की प्रक्रिया समझाई गई। उन्हें बताया गया कि निर्धारित मात्रा में रसायन मिलाकर पानी की जांच कैसे की जाती है और प्राप्त परिणामों का निर्धारित मानकों से मिलान किस तरह किया जाता है। प्रशिक्षक ने पानी में फ्लोराइड की अधिकता से होने वाली फ्लोरोसिस बीमारी के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही जल गुणवत्ता की जांच करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया, ताकि सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सके।
नल से जल मिलने से महिलाओं को मिली राहत
चिटकाकानी और त्रिभौना के ग्रामीणों ने घरों में नल से पानी मिलने के बाद अपनी दिनचर्या में आए बदलाव साझा किए। ग्राम चिटकाकानी की एक महिला हितग्राही ने बताया कि घर में पानी की सुविधा शुरू होने से काफी समय बच रहा है। अब महिलाओं को पानी लाने के लिए इधर-उधर भटकने की परेशानी से राहत मिली है।
गांव की प्राथमिक शाला की शिक्षिका ने बताया कि सभी घरों में नल की सुविधा उपलब्ध हो गई है और पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच रहा है। वहीं, ग्राम त्रिभौना की एक हितग्राही ने कहा कि अब नहाने और कपड़े धोने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। घर में ही पानी मिलने से परिवार के सभी सदस्यों को सुविधा हो रही है और बच्चों को भी पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।
चिटकाकानी के एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि पहले कुएं से पानी लाने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। अब घर-घर पानी की व्यवस्था होने से यह परेशानी काफी हद तक दूर हो गई है।
बच्चों और ग्रामीणों ने दिया जल संरक्षण का संदेश
जल सुविधा के साथ ग्रामीणों में पानी के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। स्कूली बच्चों ने “जल है तो कल है” और “जल बचाओ, जीवन बचाओ” जैसे नारों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझने, पानी की बर्बादी रोकने, जल स्रोतों की रक्षा करने और गांव की जल योजना की देखभाल करने की शपथ ली। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।
स्वच्छ पेयजल और नियमित जांच पर जोर
घर-घर नल से जल पहुंचाने का उद्देश्य केवल पानी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देना और पानी के लिए होने वाली परेशानी को कम करना भी है। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए जल गुणवत्ता की नियमित जांच, जल स्रोतों की सुरक्षा और पानी का जिम्मेदारी से उपयोग करना जरूरी है।
चिटकाकानी और त्रिभौना में नल से जल की सुविधा के साथ ग्रामीणों को जल गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण और संरक्षण की शपथ दिलाने की पहल स्वच्छ पेयजल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पानी की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता और संरक्षण पर सामूहिक ध्यान ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।











