खबर का असर: कार्यालय के आसपास हुई सफाई, कथित रूप से गायब 25 से 30 सर्विस बुक, 10 साल से पदस्थ BEO के स्थानांतरण और पुराने रिश्वत प्रकरण पर अब भी जवाब का इंतजार
बिलाईगढ़। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय बिलाईगढ़ की अव्यवस्थाओं और शिक्षकों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद आखिरकार कार्यालय के आसपास और पीछे उगी झाड़ियों की सफाई करा दी गई है। खबर के बाद हुई इस कार्रवाई को सकारात्मक पहल माना जा रहा है, लेकिन कार्यालय से जुड़ी अन्य गंभीर शिकायतों और सवालों पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। करीब 1300 शिक्षकों की सर्विस बुक की सुरक्षा, कथित रूप से गायब सेवा पुस्तिकाओं की जांच और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ BEO सत्यनारायण साहू के स्थानांतरण को लेकर अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की कार्रवाई का इंतजार है।
कार्यालय की खुली खिड़कियों के पास रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा, आगजनी की आशंका और अभिलेखों के रखरखाव को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। खबर प्रकाशित होने के बाद झाड़ियों की सफाई तो करा दी गई, लेकिन सवाल यह है कि क्या विभाग की जिम्मेदारी केवल परिसर की सफाई तक सीमित है या दस्तावेजों की सुरक्षा और अन्य शिकायतों पर भी ठोस कदम उठाए जाएंगे?
1300 शिक्षकों की सर्विस बुक की सुरक्षा पर सवाल
BEO कार्यालय में लगभग 1300 शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं और अन्य महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज रखे होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे अभिलेख शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति, वेतन निर्धारण, सेवा अवधि और सेवानिवृत्ति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़े होते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा और नियमित संधारण विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
पूर्व में कुछ शिक्षकों की सर्विस बुक गायब होने संबंधी शिकायतें और आरोप सामने आए हैं। ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी से अपेक्षा की जा रही है कि वे सभी सेवा पुस्तिकाओं का भौतिक सत्यापन कराएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने अभिलेख उपलब्ध हैं और किनकी स्थिति संदिग्ध है।
25 से 30 शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं गायब होने का आरोप, FIR के लिए थाने में आवेदन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकासखंड बिलाईगढ़ के अंतर्गत कार्यरत अनेक शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं कार्यालय से गायब होने का आरोप लगाया जा रहा है। शिक्षक संगठनों के कुछ पदाधिकारियों ने आशंका जताई है कि नई सर्विस बुक तैयार करने की प्रक्रिया की आड़ में अनियमितता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अनुमान के मुताबिक लगभग 25 से 30 शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं गायब होने की बात कही जा रही है। हालांकि, वास्तविक संख्या और इसके पीछे की परिस्थितियों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, शिक्षिका स्नेहलता ठाकुर की सेवा पुस्तिका गायब होने की बात उनकी उपस्थिति में सामने आई थी। खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित शिक्षिका को BEO कार्यालय बुलाकर उनकी सेवा पुस्तिका सुरक्षित होने का प्रमाण पत्र लिखवाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी भी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसके साथ ही कथित रूप से गायब सेवा पुस्तिकाओं के स्थान पर नई कोरी सेवा पुस्तिकाएं लेकर उनका संधारण किए जाने की चर्चा भी है।
इन परिस्थितियों में जरूरी है कि विभाग प्रत्येक शिक्षक की मूल सेवा पुस्तिका और नई तैयार की गई पुस्तिका का मिलान कराए। नौकरी की शुरुआत से लेकर वर्तमान समय तक अलग-अलग आहरण-संवितरण अधिकारियों के हस्ताक्षर, पदस्थापना संबंधी विवरण और अन्य प्रविष्टियों का सत्यापन किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो सके।
इसी तरह शासकीय प्राथमिक शाला ओटगन, संकुल जोरा के सेवानिवृत्त प्रधानपाठक गोपाल रौशिक की सेवा पुस्तिका भी कार्यालय से गायब होने की बात सामने आई है। संबंधित शिक्षक की परेशानी के बाद शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया। इसके बाद BEO सत्यनारायण साहू द्वारा बिलाईगढ़ थाना प्रभारी के समक्ष FIR दर्ज करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी मिली है।
अब पुलिस और विभागीय जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि वास्तव में कितनी सेवा पुस्तिकाएं गायब हैं और अभिलेखों के रखरखाव में कहां चूक हुई है।
10 साल से पदस्थ BEO के स्थानांतरण पर निर्णय कब?
BEO सत्यनारायण साहू के लंबे समय से बिलाईगढ़ में पदस्थ रहने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे लगभग 10 वर्षों से इसी विकासखंड में पदस्थ हैं। इस अवधि में उनके पदस्थापना और स्थानांतरण से संबंधित नियमों की समीक्षा किए जाने की मांग उठ रही है।
सवाल यह है कि क्या जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले में उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजेंगे? क्या लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी के संबंध में विभागीय नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा? फिलहाल इस दिशा में किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
पुराने रिश्वत प्रकरण में भी BEO की भूमिका पर उठे सवाल
BEO सत्यनारायण साहू के कार्यकाल के दौरान पूर्व BEO पी.के. शर्मा के निधन के बाद उनके स्वत्वों के भुगतान के एवज में कथित रिश्वत प्रकरण सामने आया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्यालय में रिश्वत लेते हुए बाबू रथराम बंजारे को ACB की टीम ने रंगे हाथ पकड़ा था।
इस प्रकरण में रथराम बंजारे के साथ BEO सत्यनारायण साहू के विरुद्ध भी अपराध दर्ज किए जाने और गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। बताया जाता है कि गिरफ्तारी के बाद श्री साहू जमानत पर हैं। हालांकि, इस मामले की वर्तमान न्यायालयीन स्थिति और संबंधित आरोपों की पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर होना आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार, भ्रष्टाचार से संबंधित मामला रायगढ़ न्यायालय में विचाराधीन है। यह भी बताया गया है कि 28 अक्टूबर को उनकी न्यायालय में पेशी थी।
इस संबंध में यह आरोप भी लगाया गया है कि वे न्यायालयीन कार्यों के लिए अपने साथ संकुल शैक्षिक समन्वयक विजय साहू को लेकर जाते हैं, जिससे विजय साहू के पदस्थ शाला में शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर और विभागीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
टेड़गीडीपा स्कूल में किराए के शिक्षक से पढ़ाई कराने का आरोप
संकुल शैक्षिक समन्वयक विजय साहू की पत्नी हेमलता साहू, जो प्राथमिक शाला टेड़गीडीपा में पदस्थ हैं, उनके नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंचने के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति में किसी किराए के शिक्षक से बच्चों को पढ़वाया जाता है। इस संबंध में पूर्व में टीवी और वेब न्यूज चैनलों पर भी खबरें प्रसारित होने की बात कही गई है।
यदि बिना विभागीय अनुमति किसी निजी व्यक्ति से नियमित रूप से अध्यापन कराया जा रहा है, तो यह जांच का विषय है कि इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी या नहीं। साथ ही स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई और निरीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा आवश्यक है।
BEO सत्यनारायण साहू के विरुद्ध न्यायालयीन प्रकरण लंबित होने और उनकी प्राचार्य पद पर पदोन्नति रोके जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पदोन्नति से संबंधित वास्तविक कारणों की पुष्टि विभागीय आदेश से ही हो सकती है।
खबर प्रकाशित होने के बाद DEO ने किया औचक निरीक्षण
समाचार पत्रों और वेब न्यूज चैनलों में खबर प्रकाशित होने के बाद 28 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मीनारायण पटेल द्वारा टेड़गीडीपा प्राथमिक शाला का औचक निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि निरीक्षण के दौरान प्रधानपाठक हेमलता साहू अपने से कनिष्ठ शिक्षक को प्रभार दिए बिना अवकाश पर पाई गईं। वहीं सहायक शिक्षक बोधीलाल कत्थाकार भी अनुपस्थित मिले। इस पर DEO द्वारा दोनों को कारण बताओ सूचना जारी किए जाने की जानकारी है।
निरीक्षण के बाद स्कूल स्तर पर कार्रवाई तो सामने आई है, लेकिन अब यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित अधिकारियों की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था की जिम्मेदारी का भी आकलन किया जाएगा या नहीं। यदि स्कूल में अनियमितताओं की शिकायतें पहले से सामने आ रही थीं, तो उनकी निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
BEO को हटाने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग
बिलाईगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शिक्षक संगठनों और स्थानीय स्तर पर BEO सत्यनारायण साहू को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की जा रही है। मांग है कि शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाओं से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों का सत्यापन किया जाए।
इसके अलावा पुराने रिश्वत प्रकरण की वर्तमान स्थिति, टेड़गीडीपा प्राथमिक शाला में सामने आए आरोपों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी नियमानुसार जांच किए जाने की मांग उठ रही है। जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
झाड़ियों की सफाई के बाद अब दस्तावेजों की सुरक्षा पर कार्रवाई का इंतजार
BEO कार्यालय के आसपास उगी झाड़ियों की सफाई होना खबर का एक प्रत्यक्ष असर जरूर है, लेकिन इससे कार्यालय की मूल समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता। लगभग 1300 शिक्षकों के सेवा अभिलेखों की सुरक्षा, 25 से 30 सर्विस बुक गायब होने के आरोप, FIR के लिए प्रस्तुत आवेदन और लंबे समय से पदस्थ अधिकारी के स्थानांतरण जैसे मुद्दे अब भी जवाब मांग रहे हैं।
निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मीनारायण पटेल पर टिकी हैं कि वे इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं। कार्यालय की झाड़ियां साफ होना शुरुआत हो सकती है, लेकिन शिक्षा विभाग की वास्तविक जवाबदेही तभी साबित होगी जब शिक्षकों के दस्तावेज सुरक्षित हों, शिकायतों की सच्चाई सामने आए और जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।











