हीरापुर गाँव के शिकारी जाति के अधिकांश बच्चे गूंगा – गूंगी क्यों पैदा होते हैं ?

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हीरापुर गाँव के शिकारी जाति के अधिकांश बच्चे गूंगा – गूंगी क्यों पैदा होते हैं ?

लैलूंगा :- रायगढ़ जिले के विकास खण्ड लैलूंगा के ग्राम पंचायत हीरापुर में शिकारी जन जाति समुदाय के लोगों में एक वंशानुगत बिमारी के रूप में देखने को मिला है । अभी तक इस वंशानुगत बिमारी की किसी भी डॉक्टर या डॉक्टरों की टीम ने फिलहाल जाँच करने नहीं आये हैं । वहीं आपको हम बता दें कि रायगढ़ जिले के सुदूर आदिवासी वनांचल क्षेत्र लैलूंगा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर एक गाँव है जिसका नाम हीरापुर है, हीरापुर गाँव पूर्व में ग्राम पंचायत ढ़ाप के अंतर्गत आता था । पिछले दशक से यह ग्राम पंचायत ढ़ाप से पृथक ग्राम पंचायत हीरापुर के रूप में अस्तित्व में आया है । जहाँ विभिन्न जाति समुदाय के लोग निवास करते हैं । उन्हीं में से एक शिकारी जन जाति समुदाय के लोग भी रहते हैं जहाँ उनकी संख्या लगभग 50 परिवार के आसपस निवास करते हैं । जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत महिला व पुरूष गूंगे तथा गूंगी हैं । यहाँ पैद होने वाले अधिकांश बच्चे तथा बच्चियाँ मुक बधीर पैदा होते हैं । जिसे लेकर लोग पिछले 15 – 20 वर्षों से आश्चर्य में हैं कि इस समुदाय में जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चे तथा बच्चियाँ गूंगे – गूंगी ( कोंदा – कोंदी ) आखिर क्यों पैदा हो रहे हैं ? यह एक गहन एवं गंभीर जाँच तथा शोध का विषय है । जबकि शासन – प्रशासन का इस ओर अभी तक ध्यान नही दिया गया है । और ना तो यहाँ किसी विशेषज्ञों की टीम आज तक इन दिव्यांगों के बारे में शोध करने नहीं पहुंची है । वहीं एक तरफ लोग तरह – तरह के कयास लगा रहे हैं कि ये सभी पूर्व जन्मों का फल भोग रहे हैं, ऐसा कहना कहाँ तक सही है । फिलहाल हाल इस बात की पुष्टि कोई नहीं करता है । यही शिकारी जन जाति समुदाय के ही एक युवक जिसका नाम श्रीप्रसाद शिकारी है वह ग्राम पंचायत हीरापुर का सरपंच निर्वाचित होकर के पंचायत का प्रतिनिधित्व कर रहा है । यह जन जाति पूर्व में पक्षियों का शिकार करना तथा घूम – घूम कर भीख मांगकर जीवन यापन करना इनकी पेशा थी । जिनका मुख्य जरिया चिड़ियों का शिकार करना तथा उसी से पेट भरना होता था, इसलिए इनकी जाति का नाम शिकारी पड़ा । अब यह जन जाति घूम – घूम कर भीख मांगने के बजाय गाँव में बस गये हैं । लेकिन इस समुदाय के लोगों का भीख मांगने का आदत अभी तक नहीं गया है । वहीं गूंगे व गूगियों की मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों को देखत हुए शासन – प्रशासन से लोग गुहार लगा रहे हैं । इनके लिए शासन के द्वारा आर्थिक सहयोग मिल सके ताकि गरीब व असहाय परिवार का उद्धार हो सके ।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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