



सुरंगपानी में बेकाबू ‘बदन बस’ का कहर—खड़ी बाइक को मारी जोरदार टक्कर, मोटरसाइकिल के उड़े परखच्चे
जशपुरनगर से रायगढ़ की ओर चलने वाली बदन यात्री बस ने एक बार फिर रफ्तार और लापरवाही की खतरनाक तस्वीर पेश कर दी। सुरंगपानी इलाके में दोपहर 12 बजे हुए इस भीषण सड़क हादसे ने राहगीरों को दहला दिया। बस की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिल दो टुकड़ों में बंट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। और डाईवर गाड़ी लेके लैलूंगा थाना पहुच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बदन बस तेज रफ्तार में थी और चालक का नियंत्रण वाहन पर नहीं रहा। जैसे ही बस सुरंगपानी के पास पहुंची, सड़क किनारे खड़ी बाइक को उसने सीधी टक्कर मार दी। टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी। लोग जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि मोटरसाइकिल के टुकड़े सड़क पर बिखरे पड़े थे। गनीमत रही कि जिस समय हादसा हुआ, बाइक के पास कोई मौजूद नहीं था, वरना बड़ा जानमाल का नुकसान हो सकता था।
हादसे में शामिल बस का वाहन क्रमांक CG13 AQ 5537 बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रूट पर बदन बसों की तेज रफ्तार पहले से ही चर्चा का विषय रही है। आए दिन ओवरस्पीडिंग, लापरवाही और नियमों की अनदेखी की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई न होने से चालक बेखौफ नजर आते हैं।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। कुछ लोगों ने बस चालक से सवाल-जवाब भी किए। वहीं, हादसे के बाद कुछ देर तक बस सड़क किनारे खड़ी रही। और डाईवर गाड़ी लेके लैलूंगा फरार हो गया। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।
सुरंगपानी क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि यहां सड़क पर अक्सर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, लेकिन गति नियंत्रण और निगरानी के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। स्पीड ब्रेकर, चेतावनी बोर्ड और नियमित चेकिंग की कमी हादसों को न्योता दे रही है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि यात्री बसों में समय पर पहुंचने की होड़ में चालक नियमों को ताक पर रख देते हैं।
हादसे के बाद पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की बात कही जा रही है। हालांकि स्थानीय जनता का साफ कहना है कि सिर्फ जांच नहीं, स्थायी समाधान चाहिए—तेज रफ्तार पर सख्ती, चालकों की काउंसलिंग और बार-बार उल्लंघन करने वालों पर लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई जरूरी है।
कुल मिलाकर, “बदन रुकता नहीं” वाली यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है—क्या सड़कों पर रफ्तार ही राज करेगी या नियमों का डर भी होगा? प्रशासन और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है कि ऐसे हादसों से सबक लेकर आम लोगों की जान की हिफाजत सुनिश्चित की जाए।








