वीबी-जीराम जी योजना बनी ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का मजबूत आधार

125 दिनों का रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी से मजबूत हो रही आर्थिक स्थिति

पत्रकार हीरालाल राठिया लैलूंगा रायगढ़


पुसौर के नावापाली में जल संरक्षण के साथ महिलाओं को मिला सम्मानजनक रोजगार

रायगढ़, 15 जुलाई 2026/ जिले में संचालित वीबी-जीराम जी योजना ग्रामीण आजीविका को नई दिशा देने के साथ-साथ जल संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रभावी परिणाम दे रही है। विकासखंड पुसौर की ग्राम पंचायत बिंझकोट के ग्राम नावापाली में योजना के तहत संचालित गेबियन निर्माण कार्य से महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल रहा है। इससे उनकी आय बढ़ी है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। वीबी-जीराम जी योजना के अंतर्गत गांव में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। गेबियन निर्माण में बड़ी संख्या में महिला श्रमिक कार्य कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पत्थरों से बनाए जा रहे ये गेबियन वर्षा जल के संरक्षण, मृदा कटाव रोकने तथा भू-जल स्तर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही योजना ग्रामीण परिवारों के लिए आय का भी सशक्त माध्यम बन रही है।

100 दिन से बढ़कर मिला 125 दिनों का रोजगार

ग्राम नावापाली की सविता साहू बताती हैं कि पहले वे मनरेगा के तहत कार्य करती थीं, जहां 100 दिनों का रोजगार और प्रतिदिन 261 रुपये की मजदूरी मिलती थी। वीबी-जीराम जी योजना के अंतर्गत गेबियन निर्माण कार्य में उन्हें 125 दिनों तक रोजगार और 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिल रही है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की अपेक्षा बेहतर हुई है। इसी गांव की रायमती सिदार भी इस योजना से जुड़कर नियमित रोजगार प्राप्त कर रही हैं। उनका कहना है कि रोजगार के दिनों में वृद्धि और मजदूरी में बढ़ोतरी से घर की जरूरतें पूरी करने में सुविधा हुई है। अब वे अन्य महिलाओं को भी इस योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

जल संरक्षण और रोजगार का मिला दोहरा लाभ

वीबी-जीराम जी योजना के तहत किए जा रहे कार्यों से एक ओर जल संरक्षण की स्थायी संरचनाएं तैयार हो रही हैं तो दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है। इससे पलायन की आवश्यकता कम होने के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ रही है।

महिलाएं बनीं बदलाव की भागीदार

सविता साहू कहती हैं कि गांव की महिलाओं को इस योजना से जुड़कर नियमित रोजगार मिल रहा है। इससे परिवार की आय बढ़ी है और आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। वे चाहती हैं कि अधिक से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठाएं और अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं। पुसौर के नावापाली की महिलाओं का अनुभव बताता है कि वीबी-जीराम जी योजना केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यही कारण है कि यह योजना गांवों में आजीविका और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, दोनों के लिए एक प्रभावी पहल बनकर उभर रही है।

चंद्रशेखर जायसवाल
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