ऑपरेशन क्लीन हंट को मिली बड़ी सफलता
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में संचालित “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत रायगढ़ कोतवाली पुलिस को ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब ₹32 लाख की धोखाधड़ी के चर्चित मामले में बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। प्रकरण में फरार चल रहे आरोपी प्रकाश मिश्रा, निवासी सोनुमुड़ा देवारपारा, रायगढ़ ने पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच न्यायालय में आत्मसमर्पण किया, जहां से अनुमति प्राप्त कर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज दिया।

सह-आरोपी पहले ही आ चुका था गिरफ्त में
इस मामले में सह-आरोपी दीपक शर्मा को पुलिस ने जुलाई माह में ही गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था। प्रकाश मिश्रा की तलाश में पुलिस लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी, क्योंकि वह घर से फरार होकर छिपा हुआ था।
फर्जी बिल-वाउचर से हुआ खुलासा
जानकारी के मुताबिक 24 मार्च 2026 को श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक रायगढ़ के संचालक कमल किशोर शाह ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी कंपनी में कार्यरत प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान लेते थे। भुगतान प्रक्रिया के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आने पर कंपनी ने जांच कराई, जिसमें सितंबर 2025 से लगातार चल रहे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर बनाकर संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों के जरिए कंपनी से करीब ₹32 लाख की राशि निकाली। इस पर कोतवाली थाने में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी।
RTO सत्यापन में हुई पुष्टि
विवेचना के दौरान बिल-वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से सत्यापन कराया गया, जिसमें कई नंबर दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के निकले, जिनका ट्रांसपोर्ट या माल ढुलाई से कोई संबंध नहीं था। संबंधित वाहन मालिकों ने भी पुष्टि की कि उन्होंने कभी श्रीराम ट्रांसपोर्ट के लिए काम नहीं किया, जिससे फर्जीवाड़े की पुख्ता पुष्टि हो गई।
पूछताछ में हुए कई खुलासे
पुलिस को सूचना मिली कि सह-आरोपी दीपक शर्मा पिता शंकरलाल शर्मा, उम्र 32 वर्ष, निवासी दरोगापारा, रायगढ़ अपने मोहल्ले में देखा गया है, जिसके बाद 29 जुलाई 2026 को उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी वाउचर तैयार करता था और जिन खातों में रकम भेजी जाती, वे लोग कमीशन काटकर बाकी राशि बैंक खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे नंबरों के जरिए दोनों आरोपियों को लौटा देते थे। दीपक शर्मा ने बताया कि करीब ₹15 लाख उसने स्वयं रखे और लगभग ₹16-17 लाख प्रकाश मिश्रा को दिए गए।
वहीं गिरफ्तार आरोपी प्रकाश मिश्रा पिता विद्यासागर मिश्रा, उम्र 27 वर्ष, निवासी सोनुमुड़ा देवारपारा, थाना जूटमिल ने पूछताछ में खुद को ट्रांसपोर्ट कार्य से जुड़ा न होने की बात कहते हुए फर्जी वाउचर तैयार करने की बात स्वीकार की। उसने डिजिटल माध्यमों से रकम प्राप्त करने की जानकारी भी पुलिस को दी। उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से रिमांड पर भेजा गया। मामले में इस्तेमाल बैंक खातों और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर विवेचना जारी है।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक अमित सिंह, उपनिरीक्षक ऐनु देवांगन और एएसआई कोसो सिंह की अहम भूमिका रही।
एसएसपी ने दी सख्त चेतावनी
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि आर्थिक धोखाधड़ी और संगठित वित्तीय अपराधों में शामिल आरोपियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है और फर्जी दस्तावेजों, बैंक खातों व डिजिटल माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






