2028 के लिए दोनों दलों में बड़ा फेरबदल
छत्तीसगढ़ की राजनीति में 2028 के चुनावी मुकाबले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गए हैं। प्रभारी से लेकर अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक, हर स्तर पर तेजी से बदलाव किए जा रहे हैं। नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से भाजपा लगातार नए प्रदेश प्रभारी की तलाश में थी, जिसके बाद अंततः पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है।
नई जिम्मेदारियों के साथ मैदान में उतरे नेता
भाजपा ने बिहार के सिद्धार्थ शंभू को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी अब स्मृति ईरानी की रणनीति और योजना के आधार पर 2028 का चुनाव जीतने की तैयारी में जुट गई है। दूसरी ओर कांग्रेस ने 2028 में सत्ता में वापसी की उम्मीद के साथ सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ की कमान सौंपी है। इस बदलाव के बाद प्रदेश की राजनीति में इसके सियासी मायनों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, कुछ इसे नई और मजबूत रणनीति के तौर पर देख रहे हैं तो कुछ इसे अलग नजरिए से आंक रहे हैं।
नितिन नवीन के उत्तराधिकारी को लेकर था सस्पेंस
नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से ही इस बात की अटकलें तेज थीं कि छत्तीसगढ़ की कमान किसके हाथों में जाएगी। हालांकि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, इसे लेकर सियासी गलियारों में लगातार चर्चा बनी रही। विपक्ष की ओर से जहां सवाल उठाए जाते रहे, वहीं सत्ता पक्ष के भीतर भी इस बात की चिंता रही कि आखिर नितिन नवीन की जगह कौन लेगा।
महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस का सीधा निशाना
छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार मीडिया प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी, तब स्मृति ईरानी कंधे पर गैस सिलेंडर लेकर घूमती थीं और बढ़े हुए दामों को लेकर सवाल पूछती थीं। उन्होंने कहा कि अब मौजूदा महंगाई की स्थिति पर स्मृति ईरानी का क्या जवाब होगा, यह सवाल उनसे जरूर पूछा जाएगा जब वे छत्तीसगढ़ आएंगी।
डिप्टी सीएम अरुण साव का पलटवार
वहीं भाजपा ने भी इस मुद्दे पर पलटवार की तैयारी पूरी कर ली है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि जब स्मृति ईरानी ने अमेठी में चुनाव लड़ा था, तब उन्होंने राहुल गांधी की समूची रणनीति को ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने कहा कि स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ आने की खबर से ही कांग्रेस बेचैन हो गई है और पार्टी की पूरी रणनीति असफल साबित हो रही है।
भूपेश बघेल पर भी साधा निशाना
अरुण साव ने आगे कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पार्टी की पूरी राजनीतिक साख को कमजोर करने के लिए भूपेश बघेल अकेले ही काफी हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की रणनीतियों को जमीनी स्तर पर असफल बनाने में उनकी अहम भूमिका रहती है, और यही वजह है कि कांग्रेस की योजनाएं शुरुआत में ही कमजोर पड़ जाती हैं।
सुखदेव भगत की मजबूत जमीनी पकड़
कांग्रेस की ओर से नियुक्त सुखदेव भगत झारखंड के लोहरदगा लोकसभा सीट से सांसद हैं और उनके पास लंबा प्रशासनिक व राजनीतिक अनुभव है। ट्राइबल नेता होने के कारण उनकी आदिवासी समाज में गहरी पकड़ मानी जाती है। राजनीति में आने से पहले वे प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैं, जिससे उन्हें सरकारी तंत्र की बेहतर समझ है। वे रोजगार और आदिवासी अधिकारों के मुद्दों पर लगातार मुखर रहे हैं।
स्मृति ईरानी की सियासी ताकत
दूसरी ओर स्मृति ईरानी भारतीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन की एक प्रभावशाली और फायरब्रांड नेता मानी जाती हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने कई मजबूत मुकाम हासिल किए हैं। मुखर वक्ता होने के साथ-साथ जमीन पर उतरकर काम करने वाली नेताओं में उनकी गिनती होती है। अमेठी की ऐतिहासिक जीत के बाद उनका सियासी कद तेजी से बढ़ा है और आज वे एक लोकप्रिय चेहरे के रूप में घर-घर तक पहचानी जाती हैं।
आगे की सियासी लड़ाई होगी दिलचस्प
फिलहाल दोनों ही राजनीतिक दलों ने अपने प्रदेश प्रभारियों की नियुक्ति पूरी कर ली है, और भाजपा ने अपने कई नेताओं को राज्य से बाहर भी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अब आगे देखना यह होगा कि बचे हुए समय में दोनों दल सत्ता हासिल करने और बचाए रखने के लिए किस रणनीति पर आगे बढ़ते हैं, जो जनता के भरोसे को अपने पक्ष में मोड़ पाने में कामयाब हो सके।






