दामापुर में हाफ नदी के शिवगंगा स्थित जर्जर एनीकट से गुजर रहे विद्यार्थी, नजदीकी रास्ते के फेर में खतरे से खिलवाड़
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया ब्लॉक के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम दामापुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां विद्यार्थी स्कूल पहुंचने के लिए हाफ नदी के शिवगंगा में बने जर्जर और टूटे एनीकट को पार कर रहे हैं। रास्ता छोटा होने के कारण बच्चे रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। एनीकट का एक हिस्सा टूटा हुआ है और वहां पानी भरा हुआ है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
जानकारी के अनुसार, दामापुर हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी प्रतिदिन इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, स्कूल आने-जाने के लिए नदी पर पुल और दूसरा मुख्य मार्ग भी उपलब्ध है, लेकिन वैकल्पिक रास्ते की दूरी अधिक होने के कारण बच्चे शॉर्टकट अपनाते हैं। इसी जल्दबाजी में वे टूटे एनीकट से होकर गुजरते हैं।
गहरे पानी में गिरने का खतरा
एनीकट का अधिकांश हिस्सा भले ही पानी से खाली हो, लेकिन टूटे हुए हिस्से में पानी भरा हुआ है। नदी का यह हिस्सा काफी गहरा बताया जा रहा है। ऐसे में संतुलन बिगड़ने या पैर फिसलने पर बच्चे पानी में गिर सकते हैं। तैरना नहीं जानने वाले बच्चों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
स्कूली बच्चों का रोजाना इस तरह जोखिम उठाकर नदी पार करना गंभीर चिंता का विषय है। दूरी कम करने के लिए अपनाया जा रहा यह शॉर्टकट कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ऐसे में बच्चों को टूटे एनीकट से गुजरने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।
जब तक एनीकट सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक बच्चों को वैकल्पिक पुल और मुख्य मार्ग का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। नदी में पानी कम होने के बाद भी टूटे हिस्से से आवागमन को सुरक्षित मानने के बजाय पहले उसकी स्थिति का आकलन जरूरी है। संबंधित विभाग और स्कूल प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय रहते पहल करनी चाहिए, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।











