
0 कंडिका 18 के अनुसार नेशनल, इंटरनेशनल, केंद्रीय, नवोदय, एकलव्य शब्द नही लगा सकते, फिर भी मिल गई मान्यता.

0 राज्यपाल के नाम कलेक्टर को सौंपी जाएगी शिकायत.
कोरबा:- शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले निजी स्कूलों में से अनेक स्कूल अब ठगी के अड्डे बनते जा रहे हैं। जहां जिले में संचालित कई स्कूल के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि शासन द्वारा प्रतिबंधित “इंटरनेशनल” शब्द का उपयोग कर स्कूल को बड़ा दिखा शिक्षा के नाम पर पालकों को गुमराह करते हुए मोटी फीस वसूल किया जा रहा है। ऐसे स्कूलों के नाम के साथ मान्यता के अन्य मापदंडों पर भी सवाल उठाया गया है।
मामले को लेकर पालकों व सामाजिक संगठनों का आरोप है कि जिले में संचालित कई निजी स्कूल संचालकों द्वारा शासन से निर्धारित नियम- कायदे को ताक पर रखकर मनमाने स्कूल संचालन की जा रही है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा अशासकीय/ निजी स्कूलों को दी जाने वाली मान्यता के लिए स्पष्ट नियमावली बनाई गई है, जिसमे कंडिका 18 के अनुसार विद्यालय के नामकरण में कोई भी निजी स्कूल अपने नाम, बोर्ड, बैनर, प्रचार सामाग्री या मान्यता दस्तावेजों में केंद्रीय, नवोदय, प्रयास, एकलव्य, शासकीय, सरकारी, नेशनल और बिना मापदंडों के इंटरनेशनल जैसे शब्दों का प्रयोग नही कर सकते। यह शब्द तभी लगाए जा सकते हैं जब स्कूल के पास सीबीएसई, आईसीएसआई, आईबी, आईजीसीएसई बोर्ड की मान्यता हो। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम, इंफ्राइस्ट्रक्चर, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, खेल मैदान हो और शासन से इसके लिए विशेष अनुमति ली गई हो। नियम के अनुसार यदि कोई स्कूल इन प्रतिबंधित शब्दों के साथ आवेदन करता है तो उसकी फाइल को देखते ही मान्यता आवेदन निरस्त किया जाना चाहिए। लेकिन इन सबके विपरीत जिले में संचालित कई स्कूल इंटरनेशनल शब्द लिखकर निजी शिक्षा नियमावली की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। जहां उन स्कूलों के सिर्फ नाम ही नही, मान्यता के अन्य मापदंडों पर भी सवाल उठाया गया है। जिसके तहत ऐसे स्कूलों में शिक्षकों की योग्यता डीएड, बीएड योग्यताधारी भी नही है, अप्रशिक्षित शिक्षकों से पढ़ाई कराई जा रही है। वहीं आरटीई के प्रवेश में भी खेला करते हुए गरीब बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा के अधिकार के 25% सीटों पर प्रवेश में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई है और ज्यादातर अपात्रों को लाभ पहुँचाया गया है। कोरबा, कटघोरा, कुसमुण्डा, दीपका, पाली सहित जिले के अन्य क्षेत्र में इंटरनेशनल शब्द का उपयोग कर संचालित निजी स्कूलें अपने- अपने क्षेत्र के भोले- भाले पालकों को यह भ्रम फैलाकर कि उनके बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा दी जाएगी, मोटी फीस वसूली जाती है, जबकि जमीनी हकीकत में बुनियादी सुविधाएं भी पूरी नही है। निजी स्कूल संचालन में इंटरनेशनल नाम का उपयोग के संबंध में जब एक आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता बादल दुबे (विजय) द्वारा सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर से मान्यता नियमावली मंगाई गई तब कंडिका 18 का स्पष्ट उल्लंघन सामने आया। इसे लेकर श्री दुबे ने भी सीधा आरोप लगाया है कि जिले के कई निजी स्कूल संचालक इंटरनेशनल के नाम से स्कूल को बड़ा दिखाकर प्रवेश के नाम पर मोटी फीस वसूल रहे हैं, जबकि स्कूल में कार्यरत शिक्षक- शिक्षिकाओं की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल हैं और पात्र गरीब बच्चें आरटीई के तहत प्रवेश के लाभ से वंचित हैं। बहरहाल जिले भर में मान्यता नियमावली उल्लंघन करने वाले संचालित निजी स्कूलों के साथ शिक्षा विभाग की मिलीभगत को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के कोरबा जिलाध्यक्ष जैनेंद्र कुर्रे द्वारा जल्द ही लिखित शिकायत राज्यपाल के नाम से कलेक्टर को सौंपी जाएगी और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी।







