SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग सक्रिय
देशभर में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे विवाद के बाद अब भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ी बैठक कर कई अहम फैसले लिए हैं। इन फैसलों के तहत जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद रहे।
दस्तावेज वेबसाइट पर होंगे अपलोड, रीजनल अफसर करेगा फैसला
नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने वाले लोगों के दस्तावेज चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे, जिसके आधार पर संबंधित रीजनल ऑफिसर फैसला लेंगे। इससे प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने की कोशिश की गई है।
नोटिस पाने वाले वोटर्स को मिलेगी बड़ी राहत
SIR के दौरान जिन मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है, उनके जरूरी दस्तावेज अब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद उनके घर जाकर एकत्र करेंगे, जिससे वोटर्स को दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जरूरत पड़ने पर उनकी सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से भी की जा सकेगी।
छूटे नाम फिर से जुड़वाने का मिलेगा मौका
जिन लोगों के नाम मौजूदा वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हैं या जो नए युवा मतदाता हैं, वे निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन कर अपना नाम जुड़वा सकेंगे।
बेघर और मजदूर वर्ग के लिए विशेष व्यवस्था
रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों और बेघर नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) स्तर पर हेल्प डेस्क और विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि कोई भी पात्र नागरिक वोटर बनने से वंचित न रह जाए।
ECINet पोर्टल की होगी विशेषज्ञों से जांच
चुनाव आयोग ने यह भी फैसला लिया है कि ECINet पोर्टल की कार्यप्रणाली की समीक्षा एक विशेषज्ञ समिति द्वारा की जाएगी, जिसमें IIT और IIM जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
दावे-आपत्ति की तारीख में हुआ इजाफा
चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा भी बढ़ा दी है। दिल्ली में अब 30 अक्टूबर तक, जबकि महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक इसके लिए आवेदन किए जा सकेंगे।
13.37 करोड़ नाम कटने का आया था आंकड़ा
गौरतलब है कि देशभर में SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13.37 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए थे, जो SIR से पहले के कुल मतदाताओं का लगभग 14.1 प्रतिशत है। इसी बड़े आंकड़े के बाद उपजे विवाद के मद्देनजर चुनाव आयोग ने ये नए फैसले लिए हैं।






