अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली और सोयाबीन के लिए 17 सहकारी समितियां अधिसूचित; मूंग का समर्थन मूल्य ₹8,780 प्रति क्विंटल
रायगढ़। जिले में किसानों को दलहन और तिलहन फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए खरीफ वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की जाएगी। इसके लिए जिले की 17 सहकारी समितियों को अधिसूचित किया गया है। योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को 31 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य है।
कृषि विभाग के अनुसार, योजना के तहत अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली और सोयाबीन की खरीदी की जाएगी। इसका उद्देश्य बाजार में कीमतें गिरने की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाना और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।
इन दरों पर खरीदी जाएंगी फसलें
योजना के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (NCCF) द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अधिसूचित फसलों की खरीदी की जाएगी। फसल समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल मूंग ₹8,780 अरहर ₹8,450 उड़द ₹8,200 मूंगफली ₹7,517 सोयाबीन ₹5,708
कृषि विभाग का कहना है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी से किसानों को बाजार भाव कम होने की स्थिति में राहत मिल सकती है। साथ ही दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
रायगढ़ जिले की 17 समितियों में होगी खरीदी
विकासखंडवार अधिसूचित सहकारी समितियों की सूची इस प्रकार है:
- रायगढ़: कोतरा, कछार और लोईंग
- खरसिया: मुरा और बानीपाथर
- तमनार: तमनार
- पुसौर: कोंड़ातराई और नवापारा (मांड)
- धरमजयगढ़: धरमजयगढ़ और छाल
- घरघोड़ा: घरघोड़ा और कुडुमकेला
- लैलूंगा: लैलूंगा, कोड़ासिया, लारीपानी, लिबरा और राजपुर
किसान अपने नजदीकी अधिसूचित सहकारी समिति में संपर्क कर पंजीयन संबंधी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
पंजीयन के लिए इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
योजना का लाभ लेने के लिए नए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। पहले से पंजीकृत किसानों को आवश्यकता के अनुसार अपने पंजीयन में संशोधन कराना अनिवार्य है। संबंधित खेत में बोई गई दलहन-तिलहन फसल का रकबा गिरदावरी में दर्ज होना भी जरूरी है।
पंजीयन के लिए इन दस्तावेजों की छायाप्रति आवश्यक होगी:
- ऋण पुस्तिका
- बी-1 और पी-2
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक
पंजीयन, संशोधन और योजना से संबंधित जानकारी के लिए किसान ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
दलहन-तिलहन की खेती से बढ़ सकते हैं आय के अवसर
जिले के ऊंचे और कम अनुकूल खेतों में धान का उत्पादन अपेक्षाकृत कम होने पर किसानों को लागत के अनुरूप लाभ प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में दलहन और तिलहन फसलों की खेती वैकल्पिक अवसर उपलब्ध करा सकती है।
कृषि विभाग के अनुसार, इन फसलों का उचित मूल्य मिलने से किसान फसल विविधीकरण की ओर प्रोत्साहित हो सकते हैं। इससे धान पर निर्भरता कम करने और खेती से आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है।
रबी सीजन में चना, मसूर और सरसों की भी होगी खरीदी
खरीफ सीजन के बाद आगामी रबी सीजन में भी अधिसूचित सहकारी समितियों के माध्यम से चना, मसूर और सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। किसान खरीफ फसलों की कटाई के बाद रबी सीजन के लिए इन फसलों की खेती की योजना बना सकते हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर पंजीयन कराने की अपील की है, ताकि वे योजना का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूरी कर सकें।











