नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा शक्ति को सशक्त और सक्षम भारत के निर्माण का प्रमुख आधार बताया। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात और उनसे मिले आशीर्वाद से जुड़ी यादें भी साझा कीं।
सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इस वैश्विक आयोजन में भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, जीवन मूल्यों और युवा पीढ़ी की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
युवा शक्ति से बनेगा विकसित भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं की क्षमता और उनकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत, सक्षम और विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और रचनात्मक सोच का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करना आवश्यक है।
उन्होंने युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और जीवन के आदर्शों से जोड़ने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ी यादें कीं साझा
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात और उनसे प्राप्त आशीर्वाद का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ी स्मृतियां उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का हिस्सा रही हैं।
स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत और भारतीय आध्यात्मिक दर्शन के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके विचारों और शिक्षाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को भारतीय संस्कृति, आत्मचिंतन और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला।
वैश्विक स्तर पर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का संदेश
भारत मंडपम में आयोजित यह सम्मेलन भारतीय आध्यात्मिक विरासत और उसके वैश्विक प्रभाव पर संवाद का अवसर प्रदान कर रहा है। इसमें देश-विदेश से आए प्रतिभागियों की भागीदारी भारतीय दर्शन, संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रति अंतरराष्ट्रीय रुचि को भी रेखांकित करती है।











