अगले तीन दिनों तक जारी रह सकता है बारिश का दौर, रायपुर के अंतरराज्यीय बस स्टैंड में भी भरा पानी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार सुबह से तेज बारिश हो रही है। लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। उत्तरी छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले तीन दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। सोमवार को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटे में भी राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है।
रायपुर के अंतरराज्यीय बस स्टैंड में जलभराव
राजधानी रायपुर में सुबह से हो रही तेज बारिश का असर शहर की व्यवस्थाओं पर भी दिखाई दिया। करोड़ों रुपये की लागत से बने अंतरराज्यीय बस स्टैंड परिसर में जल निकासी व्यवस्था की स्थिति खराब नजर आई। बारिश के बाद परिसर में जगह-जगह पानी भर गया।
बस स्टैंड परिसर में बने गड्ढों में पानी भरने से कई वाहन फंस गए। यात्रियों और राहगीरों को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव और जल निकासी की समस्या को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
MCB में 708.4 मिमी औसत बारिश
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में 1 जून से 16 अगस्त तक 708.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अब तक सबसे अधिक बारिश मनेन्द्रगढ़ तहसील में 841.8 मिमी दर्ज की गई है।
तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार चिरमिरी में 804.2 मिमी, खड़गवां में 579.5 मिमी, भरतपुर में 725.5 मिमी, कोटाडोल में 748.5 मिमी और केल्हारी में 551.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
उत्तरी छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने उत्तरी छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव के साथ नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
लगातार बारिश के कारण रायपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में यातायात प्रभावित हो सकता है। वहीं प्रशासन और स्थानीय निकायों के सामने जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने तथा निचले इलाकों में संभावित जलभराव से निपटने की चुनौती बनी हुई है।






