सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला: कुलदीप साहू समेत 4 दोषी करार, 8 अक्टूबर को सजा पर फैसला

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714 दिन बाद आया अदालत का फैसला; हत्या, दुष्कर्म और POCSO मामले में दोषसिद्धि, पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने की कोशिश में कुलदीप को 10 साल की सजा

रायपुर/सूरजपुर। विशेष रिपोर्ट। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। हेड कांस्टेबल तालिब शेख की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। मामले में दोषियों को दी जाने वाली सजा की मात्रा पर 8 अक्टूबर को फैसला सुनाया जाएगा।

लगभग 714 दिन बाद आए इस फैसले के साथ ही अक्टूबर 2024 में सामने आए इस बहुचर्चित हत्याकांड के न्यायिक परीक्षण का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

चार आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और POCSO से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराया

न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके, फूल सिंह उर्फ रिंकू और आरयन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को महिला और उसकी नाबालिग बेटी की हत्या से जुड़े मामले में दोषी माना है।

नाबालिग से संबंधित अपराधों के कारण मामले में POCSO Act के प्रावधान भी लागू किए गए थे। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहियों के आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को संबंधित गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया।

अब अदालत 8 अक्टूबर को यह तय करेगी कि दोषियों को कानून के तहत कितनी सजा दी जाए।

पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने की कोशिश में कुलदीप को 10 साल की सजा

हत्याकांड से पहले हुई घटनाओं के दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वाहन से कुचलने की कोशिश के मामले में भी अदालत ने कुलदीप साहू को दोषी माना है। इस मामले में अदालत ने उसे 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।

तत्कालीन घटनाक्रम के अनुसार पुलिस का आरोप था कि कुलदीप ने पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने का प्रयास किया था।

फायरिंग के मामले में कुलदीप को मिला संदेह का लाभ

हत्याकांड के बाद फरार होने के दौरान पुलिस टीम पर कथित फायरिंग के मामले में अदालत का फैसला अलग रहा। इस प्रकरण में कुलदीप साहू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। इसी मामले में सूरज साहू और नीलकेश्वर साहू को भी अदालत ने बरी कर दिया।

इससे स्पष्ट है कि अदालत ने अलग-अलग आरोपों और उनके समर्थन में प्रस्तुत साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया तथा जिन आरोपों को अभियोजन पक्ष पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका, उनमें आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।

अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। फैसले को लेकर बड़ी संख्या में लोग कोर्ट परिसर में मौजूद रहे और मामले की कार्रवाई पर नजर बनाए रखी।

कोर्ट से बाहर निकलते समय कैमरे के सामने मुस्कुराता नजर आया कुलदीप

अदालत की कार्रवाई के बाद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को पुलिस कस्टडी में कोर्ट से बाहर लाया गया। इस दौरान सामने आए वीडियो में वह कैमरे के सामने मुस्कुराता और पोज देता नजर आया। उसके इस व्यवहार को लेकर कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच चर्चा होती रही।

13-14 अक्टूबर 2024 की दरमियानी रात सामने आया था मामला

यह पूरा मामला 13 और 14 अक्टूबर 2024 की दरमियानी रात सामने आया था। सूरजपुर में हेड कांस्टेबल तालिब शेख की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के बाद दोनों के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर मिले थे। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था।

तत्कालीन पुलिस जांच में महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप भी सामने आया था। नाबालिग बच्ची से जुड़े आरोपों के चलते मामले में POCSO कानून के प्रावधान भी जोड़े गए।

घटना के बाद सूरजपुर में तनाव की स्थिति बनी और आरोपी के घर सहित अन्य परिसरों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई थीं।

जांच के दौरान कई नाम सामने आए

जांच आगे बढ़ने के साथ मुख्य आरोपी के अलावा अन्य लोगों के नाम भी सामने आए और गिरफ्तारियां हुईं। मामले की जांच एवं कार्रवाई को लेकर पुलिस विभाग की भूमिका भी चर्चा में रही। बाद में एक आरक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षक प्रदीप साहू को बर्खास्त किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक हुई थी।

अब 8 अक्टूबर पर टिकी नजर

चार आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद अब मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 8 अक्टूबर है। इसी दिन अदालत हत्या, दुष्कर्म और POCSO से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा की मात्रा पर फैसला सुनाएगी।

सूरजपुर का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि इसमें एक पुलिसकर्मी के परिवार की महिला और नाबालिग बेटी की हत्या हुई थी। घटना के बाद कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर व्यापक चर्चा हुई।

अदालत का वर्तमान फैसला प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक परीक्षण के आधार पर आया है। वहीं जिन आरोपों में आरोपियों को दोषमुक्त किया गया है, उनका निष्कर्ष अलग है। मामले की अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक कार्यवाही और संभावित अपीलों पर निर्भर करेगी।

चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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