5 अक्टूबर को राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक में एमओयू प्रस्ताव पर होगी चर्चा, उपचार से लेकर पुनर्वास और प्रशिक्षण तक सहयोग का प्रस्ताव
रायपुर। नवा रायपुर स्थित नंदनवन जू एवं जंगल सफारी में वन्यजीवों की चिकित्सा, बचाव और पुनर्वास व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम पहल प्रस्तावित है। गुजरात के जामनगर स्थित ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC), जिसे वंतारा के नाम से जाना जाता है, के साथ तकनीकी सहयोग के लिए एमओयू करने की तैयारी है। प्रस्ताव पर 5 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी। फिलहाल यह सहयोग प्रस्ताव के स्तर पर है।
नंदनवन जंगल सफारी करीब 800 एकड़ क्षेत्र में फैली है और यहां शाकाहारी, भालू, बाघ तथा सिंह सफारी संचालित हैं।
वन्यजीवों के स्वास्थ्य और रेस्क्यू पर रहेगा फोकस
प्रस्तावित एमओयू के तहत जंगल सफारी में वन्यजीव प्रबंधन, संरक्षण, पशु कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं, रेस्क्यू और पुनर्वास से जुड़े कार्यों में तकनीकी सहयोग लेने की योजना है।
इसका उद्देश्य वन्यजीवों की देखभाल से जुड़ी वैज्ञानिक और आधुनिक कार्यप्रणालियों को मजबूत करना तथा जरूरत के अनुसार विशेषज्ञता और तकनीकी जानकारी साझा करना है।
पशु चिकित्सा से लेकर पोषण तक साझा होगी विशेषज्ञता
प्रस्ताव में वन्यजीवों की चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की बात कही गई है। इसमें बीमारियों की जांच, उपचार, रेस्क्यू और पुनर्वास से जुड़ी तकनीकों का आदान-प्रदान शामिल है।
इसके अलावा पशु पोषण, व्यवहार प्रबंधन और देखभाल की बेहतर पद्धतियों पर भी दोनों संस्थानों के बीच जानकारी साझा करने का प्रस्ताव है। वैज्ञानिक शोध, डेटा साझा करने और दस्तावेजीकरण को भी सहयोग के दायरे में रखा गया है।
कर्मचारियों को प्रशिक्षण और एक्सचेंज विजिट का प्रस्ताव
एमओयू के तहत जंगल सफारी के कीपर, पशु चिकित्सक और तकनीकी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए एक्सचेंज विजिट की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, ताकि दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ और कर्मचारी एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझ सकें तथा बेहतर व्यवस्थाओं को अपनाया जा सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर और बायो-सिक्योरिटी पर भी सहयोग
वन्यजीवों के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ क्वारंटाइन व्यवस्था और बायो-सिक्योरिटी यानी जैव सुरक्षा के आधुनिक तरीकों पर भी सहयोग का प्रस्ताव है।
रेस्क्यू और पुनर्वास से जुड़ी विशेष सुविधाओं के विकास में तकनीकी जानकारी साझा करने की योजना भी इसमें शामिल है।
संरक्षण प्रजनन और वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर
प्रस्ताव में वन्यजीव संरक्षण, संरक्षण प्रजनन और उनकी संख्या के वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है। दोनों संस्थान केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वैज्ञानिक शोध और संबंधित आंकड़ों के आदान-प्रदान पर सहयोग कर सकते हैं।
5 अक्टूबर की बैठक में होगा प्रस्ताव पर विचार
राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 5 अक्टूबर 2026 को होने वाली बैठक में प्रस्तावित एमओयू को चर्चा और विचार के लिए रखा जाएगा। इसलिए फिलहाल वंतारा के साथ साझेदारी को अंतिम रूप नहीं मिला है। बैठक में प्रस्ताव पर निर्णय के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
यदि एमओयू को मंजूरी मिलती है, तो नंदनवन जू एवं जंगल सफारी में वन्यजीवों की चिकित्सा, रेस्क्यू, पुनर्वास, प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता से जुड़े कार्यों में सहयोग का औपचारिक ढांचा तैयार हो सकेगा।






