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Dharamjaigarh News: चुनावी वादे भूले जनप्रतिनिधि! सड़क मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने जुटाया चंदा, सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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धरमजयगढ़। चुनाव के दौरान विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। धरमजयगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत कूमा के नकनापारा, पटेलपानी और खुरनूपानी में सड़क की बदहाल स्थिति से परेशान ग्रामीण अब खुद ही मरम्मत का काम करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा जुटाया और जेसीबी व ट्रैक्टर की मदद से जर्जर रास्ते को सुधारने की पहल शुरू कर दी। इस स्थिति ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली और बुनियादी सुविधाओं के प्रति जिम्मेदारों की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पंचायत से गुहार लगाते रहे ग्रामीण, अब खुद संभाली सड़क सुधारने की जिम्मेदारी

ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क की मरम्मत को लेकर सरपंच और सचिव से कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि मोहल्ले की समस्याओं को सुनने और मौके पर पहुंचकर स्थिति देखने में भी जनप्रतिनिधियों ने अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई।

ग्रामीणों ने वर्तमान सरपंच मानती राठिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वे स्वयं मोहल्ले में नहीं पहुंचतीं। कई बार उनके स्थान पर उनके पति सुरेश राठिया मौके पर पहुंचते हैं और स्वयं को सरपंच बताते हैं। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव सुशील तिर्की के समक्ष समस्या रखने के बाद भी उन्हें संतोषजनक जवाब या आश्वासन नहीं मिल पाता।

इस संबंध में पंचायत सचिव सुशील तिर्की से फोन पर पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उन्होंने इस मामले में सरपंच से बात करने की बात कही। इसके बाद सरपंच से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। सरपंच का जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

धान खरीदी से पहले रास्ते की चिंता, टूटी पुलिया से बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों के सामने समस्या इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि आगामी 15 नवंबर से धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में जर्जर सड़क और टूटी हुई छोटी पुलिया किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। किसानों को धान लेकर आवागमन करने में कठिनाई होने की आशंका है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के बाद भी सड़क और पुलिया की मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने स्वयं चंदा जुटाकर रास्ते को सुधारने का निर्णय लिया। ग्रामीणों के अनुसार, मरम्मत कार्य के दौरान सरपंच पति सुरेश राठिया, पंचायत सचिव सुशील तिर्की और क्षेत्रीय जनपद सदस्य (बीडीसी) मदन राठिया भी मौके पर पहुंचे थे। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

पंचायत अधिनियम के तहत तय हैं विकास और जवाबदेही के दायित्व

छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत ग्राम पंचायत को स्थानीय विकास, सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव और ग्रामीण आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, ग्राम सभा को पंचायत के कार्यों, विकास योजनाओं और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग पर निगरानी रखने तथा सवाल उठाने का अधिकार प्राप्त है।

ऐसे में ग्रामीणों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए स्वयं चंदा जुटाकर मरम्मत करने की नौबत आना पंचायत की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना की समीक्षा की आवश्यकता को सामने लाता है। यह भी जांच का विषय है कि संबंधित मार्ग और पुलिया की मरम्मत के लिए 15वें वित्त आयोग अथवा अन्य विकास मदों से कोई राशि उपलब्ध थी या नहीं। यदि बजट उपलब्ध था, तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया? और यदि राशि उपलब्ध नहीं थी, तो समस्या के समाधान के लिए उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्ताव भेजने की पहल हुई या नहीं?

निर्वाचित महिला सरपंच की जगह पति की भूमिका पर भी सवाल

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल निर्वाचित महिला सरपंच की भूमिका को लेकर भी उठ रहा है। पंचायत के वैधानिक अधिकार और जिम्मेदारियां निर्वाचित सरपंच के पास होती हैं। ऐसे में यदि सरपंच के स्थान पर उनके पति या कोई अन्य परिजन पंचायत के कामकाज और निर्णयों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, तो उनकी भूमिका और अधिकारों की सीमा की समीक्षा जरूरी हो जाती है। पंचायत के कार्यों में निर्वाचित प्रतिनिधि की जवाबदेही और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।

अब प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद, ग्रामीणों को कब मिलेगी राहत?

कूमा पंचायत के नकनापारा, पटेलपानी और खुरनूपानी की स्थिति केवल एक सड़क की बदहाली तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और पंचायत स्तर पर जवाबदेही से जुड़ा मामला है। जब ग्रामीणों को अपने ही गांव का रास्ता सुधारने के लिए चंदा जुटाना पड़े, तो पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब निगाहें जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं। क्या संबंधित अधिकारी सड़क और टूटी पुलिया का स्थलीय निरीक्षण करेंगे? क्या पंचायत के उपलब्ध बजट, प्रस्तावों और खर्च की जांच होगी? और क्या धान खरीदी शुरू होने से पहले ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिल पाएगी?

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चंद्रशेखर जायसवाल
चंद्रशेखर जायसवाल
OWNER/EDITOR - CHANDRASHEKHAR JAISAWAL Mo.-9340765733
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