मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। औंधी क्षेत्र में पिछले दिनों दिखाई दिए बाघ की पहचान वन विभाग ने कर ली है। विभाग के अनुसार यह करीब तीन वर्ष का नर बाघ है। जांच में यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है कि बाघ महाराष्ट्र के ताड़ोबा टाइगर रिजर्व से नहीं आया है। माना जा रहा है कि युवा बाघ अपने मूल क्षेत्र से अलग होकर दूसरे इलाके की ओर पलायन करते हुए औंधी क्षेत्र तक पहुंचा है।
वन्यजीव कॉरिडोर की संभावना की जांच
बाघ की मौजूदगी से क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही के किसी संभावित नए मार्ग यानी वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की संभावना को बल मिला है। वन विभाग अब बाघ के आने-जाने के मार्ग और क्षेत्र में उसकी गतिविधियों की निगरानी कर रहा है।

मानपुर क्षेत्र की सीमा महाराष्ट्र के ताड़ोबा टाइगर रिजर्व से लगी होने के कारण यहां बाघों की मौजूदगी को अब तक ताड़ोबा से जोड़कर देखा जाता रहा है। हालांकि, इस मामले में वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि औंधी में दिखाई दिया बाघ ताड़ोबा से नहीं आया है।

कान्हा क्षेत्र से आवाजाही की संभावना
वन्यजीव विशेषज्ञों के स्तर पर यह संभावना भी सामने आती रही है कि मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र से बाघ मानपुर-औंधी की ओर पहुंच सकते हैं। इस क्षेत्र को संभावित वन्यजीव कॉरिडोर के रूप में भी देखा जाता रहा है। हालांकि वन विभाग ने इस संभावना की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
छुरिया से मोहला तक पहले भी दिख चुके हैं बाघ
मानपुर-औंधी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी का यह पहला संकेत नहीं है। इससे पहले छुरिया क्षेत्र में बाघिन और मोहला के आसपास बाघ के पदचिह्न मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले दो से ढाई वर्षों में क्षेत्र में वन्यजीवों की सक्रियता बढ़ने के संकेत मिले हैं। ऐसे में औंधी में युवा नर बाघ की मौजूदगी वन विभाग के लिए क्षेत्र में वन्यजीवों के संभावित आवागमन मार्गों का अध्ययन करने का महत्वपूर्ण अवसर भी मानी जा रही है।





