नई दिल्ली। अक्सर लोग मानते हैं कि आयकर विभाग की नजर केवल लाखों-करोड़ों रुपये के लेनदेन पर रहती है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। बैंक खाते या खातों की किताबों में जमा ऐसी रकम, जिसका स्रोत स्पष्ट न हो, आयकर विभाग की जांच के दायरे में आ सकती है। रकम 60 हजार रुपये हो या 6 लाख रुपये, केवल राशि के आधार पर यह तय नहीं होता कि विभाग सवाल पूछ सकता है या नहीं।
आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 102 में अस्पष्ट जमा राशि (Unexplained Credits) से संबंधित प्रावधान हैं। इसके तहत यदि करदाता के खातों में कोई रकम जमा पाई जाती है और वह उसके स्रोत या प्रकृति के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाता, तो निर्धारित कानूनी शर्तों के अधीन उस रकम को कर योग्य आय माना जा सकता है। <Cite refs={[“turn867445search19″,”turn867445search1”]}/>
₹60 हजार की रकम पर भी पूछे जा सकते हैं सवाल
टैक्स से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, किसी लेनदेन की जांच में केवल रकम का आकार ही निर्णायक नहीं होता। यदि खाते में जमा राशि के स्रोत को लेकर संदेह हो या उपलब्ध रिकॉर्ड से उसका मिलान न हो, तो करदाता से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। हालांकि, बैंक खाते में ₹60 हजार जमा होने मात्र से आयकर नोटिस आना तय नहीं है। रकम का स्रोत, लेनदेन की प्रकृति और उपलब्ध दस्तावेज भी महत्वपूर्ण होते हैं।
किन दस्तावेजों को रखना जरूरी?
यदि आपके खाते में किसी व्यक्ति से पैसा आया है, तो लेनदेन की प्रकृति के अनुसार संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। उदाहरण के लिए:
- वेतन या कारोबार की आय: वेतन पर्ची, बिल, चालान और आय संबंधी रिकॉर्ड।
- परिवार से मिली रकम या उपहार: लेनदेन का प्रमाण और जरूरत के अनुसार संबंध या उपहार से जुड़े दस्तावेज।
- उधार लिया गया पैसा: रकम देने वाले व्यक्ति का विवरण, बैंक ट्रांसफर का रिकॉर्ड और ऋण संबंधी दस्तावेज।
- अपनी ही दूसरी बैंक खाते से ट्रांसफर: दोनों खातों की स्टेटमेंट और ट्रांसफर का विवरण।
नोटिस आने पर क्या करें?
यदि आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस मिलता है, तो उसकी समय-सीमा और उसमें मांगी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें। संबंधित बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन के प्रमाण जुटाकर निर्धारित समय में जवाब दें। जरूरत पड़ने पर चार्टर्ड अकाउंटेंट या कर विशेषज्ञ की सहायता लें।











