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ग्रामीणों ने सर्वे करने में कई आपत्ति तो अधिकारियों से ग्रामीणों को जेल में डालने की मिली धमकी

ग्रामीणों ने सर्वे करने में कई आपत्ति तो अधिकारियों से ग्रामीणों को जेल में डालने की मिली धमकी

तमनार क्षेत्र के ग्रामीण अपने, जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्षरत है, पर उद्योग प्रबंधन और जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन उद्योगों को जमीन दिलाने में लगा हुआ है। वहीं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उद्योग प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्रामीणों के जमीनों पर बिना उनकी सहमति एवं ग्राम सभा किये बगैर जमीनों पर अवैध बेजा कब्जा एवं सर्वे जबरन किया जा रहा है। जो कि नियम कायदा से हटकर हैं, उनके द्वारा उच्च अधिकारियों को आप बिती बताने एवं समस्याओं को लेकर शिकायत पत्र देने के बाद भी उनके हक में फैसला नहीं दी जाती है बल्कि झूठी सांत्वना देकर ग्रामीणों को वापस लौटा दिया जाता रहा है।

वहीं कुछ दिनों बाद पुन: उनके जमीनों को अवैध बेजा कब्जा के नियत से सर्वे करने पहुंच जाते है। जिला प्रशासन और उद्योग प्रबंधन की इस प्रकार रवैये से ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी जा रही है आखिर भोले भाले ग्रामीणों को अपने ही हक की जमीन को बचाने के लिए कब तक लड़ाई लड़नी होगी।

09 दिसंबर 2023. दिनांक 08/12/2023 को एससीसीएल के ठेकेदार एवं कंपनी द्वारा रायगढ़ जिले के तमनार तहसील के ग्राम पंचायत पेलमा में रेलवे लाइन का सर्वे करने दो लोगों की टीम पहुंची। जिसकी जानकारी गांव के ग्रामीणों को मिली गांव के लोगों ने चारों तरफ से घेर लिया और दोनों सर्वे करने बाले को पकड़कर ग्राम सभा में पेश किया गया और पूछताछ किया गया साथ ही जानकारी ली गई कि ग्राम सभा की अनुमति एवं वन विभाग की अनुमति ली गई है या नहीं । उक्त सर्वे टीम के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। इसके बाद उनके अधिकारियों को बुलाया गया उनको भी किसी प्रकार की जानकारी नहीं थी। इसके बाद उक्त सर्वे टीम और अधिकारियों को गांव में बिना अनुमति की न घुसने की हिदायत दी गई। ग्रामीणों द्वारा सर्वे टीम को सर्वे करने से रोक लगाने पर ग्राम पंचायत पेलमा सरपंच को अनुविभागीय दंडाधिकारी घरघोड़ा रिषा सिंह द्वारा ग्रामीणों को जेल में डालने की धमकी दी गई। अनुविभागीय अधिकारी रिषा सिंह के धमकी के बाद फर्जी सर्वे करने आये टीम की लिखित शिकायत ग्रामीणों द्वारा तमनार थाने में की गई। उसके बाद क्षेत्र के सभी ग्रामीणों द्वारा एक बैठक आहूत की गई और निर्णय लिया गया कि चाहे उन्हें जेल जाना पड़े या जान जाये पर हक ही जल जंगल जमीन अपनी सहमति के बगैर किसी भी कीमत से कोई भी कंपनी को नहीं देंगे और ना हि सर्वे करने देंगे।

अब यह देखना है कि ग्रामीणों के शिकायत पर प्रशासन द्वारा कोई संज्ञान लिया जाता है या उद्योंगो से सांठगांठ कर जिला प्रशासन ग्रामीणों को खदेड़ने में कामयाब हो जायेगा। यह तो समय ही बतायेगा।

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