पुसौर की प्राथमिक शालाओं में इबारती सवालों और कहानी आधारित गतिविधियों का आयोजन, कई विद्यालयों में हुआ न्योता भोज
रायगढ़, 16 अक्टूबर 2026। जिले में प्राथमिक स्तर पर बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता को मजबूत करने के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड पुसौर की प्राथमिक शालाओं में 15 अक्टूबर को इबारती प्रश्न मेला एवं हिंदी कहानी मेले का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के जरिए बच्चों ने खेल, पहेली, कहानी और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से गणित एवं हिंदी की अवधारणाओं को रोचक तरीके से समझा।

इबारती सवालों से मजबूत हुई गणितीय समझ
इबारती प्रश्न मेले में बच्चों ने शब्दों और संख्याओं के आधार पर सवाल बनाना, गणितीय संक्रियाओं की पहचान करना और जोड़ से जुड़े प्रश्न तैयार कर उन्हें हल करना सीखा। ‘शब्द उठाओ, सवाल बनाओ’ और ‘संख्याओं से सवाल बनाओ’ जैसी गतिविधियों ने बच्चों को सवाल समझने, उनका विश्लेषण करने और स्वयं समाधान खोजने का अवसर दिया। इससे गणित को दैनिक जीवन के उदाहरणों से जोड़कर सीखने में मदद मिली।
हिंदी कहानी मेले में बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता
हिंदी कहानी मेले में अक्षरों की पहचान, दो अक्षरों वाले शब्द बनाना, चित्रों के नाम बताना और शब्दों की मदद से कहानी तैयार करने जैसी गतिविधियां कराई गईं। बच्चों ने अधूरी कहानी पूरी करने, चित्र देखकर कहानी बनाने, चित्रों का वर्णन करने, भाव व्यक्त करने और पहेलियां हल करने में भी भाग लिया। इन गतिविधियों से बच्चों की पठन क्षमता, शब्द भंडार, कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति कौशल को प्रोत्साहन मिला।
शिक्षकों और पालकों की सहभागिता से बढ़ा उत्साह
आयोजन में प्रधान पाठकों, शिक्षकों और संकुल अकादमिक समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बच्चों के सीखने के स्तर के अनुरूप तैयार गतिविधियों के माध्यम से उन्हें सक्रिय भागीदारी और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। कई प्राथमिक शालाओं में इस अवसर पर न्योता भोज भी आयोजित किया गया। पालकों, शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से विद्यालयों में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला।
बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता पर जोर
गतिविधि आधारित शिक्षण का उद्देश्य बच्चों में विषयों के प्रति रुचि विकसित करने के साथ उनकी समझ को मजबूत बनाना है। गणितीय सवालों और हिंदी कहानी से जुड़ी गतिविधियों के जरिए बच्चों को सवाल पूछने, अपनी बात रखने, रचनात्मक सोच विकसित करने और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया गया। इस तरह के आयोजन प्राथमिक स्तर पर बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता को मजबूत करने और बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं।











