पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है व्रत, चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद होगा व्रत का पारण
करवा चौथ 2026। करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत की शुरुआत सुबह सरगी ग्रहण करने के साथ होती है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ की पूजा में करवा, छलनी, दीपक और रोली सहित कई सामग्रियों का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में पूजा की तैयारी पहले से कर लेना बेहतर रहता है, ताकि पूजा के समय किसी जरूरी सामग्री की कमी न हो।
करवा चौथ की पूजा थाली में जरूर रखें ये चीजें
1. जल से भरा करवा: पूजा थाली में जल से भरा करवा जरूर रखें। इसी करवे से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। करवे को ढकने के लिए ढक्कन भी रखें।
2. छलनी: करवा चौथ की परंपरा में छलनी का विशेष महत्व है। चंद्रमा के दर्शन के बाद महिलाएं छलनी से पति का चेहरा देखती हैं और फिर व्रत खोलती हैं।
3. फूल, धूप और कपूर: पूजा और आरती के लिए ताजे फूल, धूपबत्ती, कपूर और माचिस रखें। इनका इस्तेमाल पूजा के दौरान किया जाता है।
4. देसी घी और दीपक: पूजा और आरती के लिए दीपक तथा देसी घी की व्यवस्था पहले से कर लें।
5. रोली और अक्षत: चौथ माता की पूजा, तिलक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार रोली तथा साबुत चावल यानी अक्षत रखें।
6. मिठाई और पानी: पूजा थाली में मिठाई और पानी का गिलास भी रखें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद परंपरा के अनुसार पति के हाथों जल ग्रहण कर और मिठाई खाकर व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ 2026 पर कब निकलेगा चांद?
करवा चौथ के दिन चंद्र दर्शन का महिलाओं को बेसब्री से इंतजार रहता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
ध्यान दें: दिए गए मूल विवरण में 29 अक्टूबर को रात 8:39 बजे चंद्रोदय होने का उल्लेख है। वर्ष 2026 में करवा चौथ की सही तिथि और अपने शहर का चंद्रोदय समय स्थानीय पंचांग से जरूर सत्यापित कर लें।
करवा चौथ पर इन 4 गलतियों से बचें
1. कपड़ों के रंग को लेकर मान्यता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन लाल रंग को सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। कुछ परंपराओं में काले और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।
2. व्रत कथा पढ़ना न भूलें: करवा चौथ की पूजा में व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। पूजा के दौरान कथा के लिए भी समय जरूर निकालें।
3. वाद-विवाद से बचें: व्रत के दौरान मन को शांत रखने, किसी से अनावश्यक विवाद न करने और मधुर वाणी बोलने की सलाह दी जाती है।
4. सरगी और सुहाग सामग्री का सम्मान करें: कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी और सुहाग का सामान देती हैं। इसे स्नेह और परंपरा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसका आदर करें।
पूजा की तैयारी पहले से कर लें
करवा चौथ का पर्व आस्था, प्रेम और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से जुड़ा है। पूजा सामग्री पहले से तैयार रखने और अपने शहर के अनुसार चंद्रोदय का सही समय जानने से व्रत की तैयारी आसान हो सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि तथा परंपराओं में अंतर भी हो सकता है, इसलिए अपने घर की परंपरा के अनुसार पूजा करें।











